बलिया को मिलेगी विकास की नई रफ्तार! जनवरी 2027 से पूरी तरह चालू होगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, यूपी-बिहार का सफर होगा आसान

बलिया: पूर्वांचल के विकास और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ी खुशखबरी सामने आई है। गाजीपुर से बलिया होते हुए बिहार की सीमा तक निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जनवरी 2027 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के शुरू होने से बलिया, गाजीपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।

करीब 5,320 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा 134.30 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है।

चार चरणों में तैयार हो रहा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस महत्वपूर्ण परियोजना का निर्माण चार चरणों में किया जा रहा है।

पहले चरण में हृदयपुर से शाहपुर तक 42.50 किलोमीटर सड़क पर वाहनों का संचालन शुरू हो चुका है। वहीं, शाहपुर से पिंडारी तक 35.65 किलोमीटर लंबे दूसरे चरण को नवंबर 2026 के अंत तक चालू करने की तैयारी है।

तीसरे चरण के अंतर्गत पिंडारी से बैरिया होते हुए रिविलगंज बाईपास तक करीब 38.37 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस हिस्से को जनवरी 2027 में यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

परियोजना के चौथे हिस्से में लगभग 17.27 किलोमीटर लंबा बक्सर स्पर शामिल है, जिससे बिहार के बक्सर क्षेत्र को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।

बलिया और गाजीपुर के 184 गांवों को मिलेगा लाभ

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार है। यह मार्ग गाजीपुर और बलिया के कुल 184 गांवों से होकर गुजर रहा है।

इनमें गाजीपुर जिले के 86 गांव, बलिया क्षेत्र के 82 गांव और बैरिया क्षेत्र के 16 गांव शामिल हैं।

एक्सप्रेसवे के शुरू होने से आसपास के क्षेत्रों में आवागमन आसान होने की उम्मीद है। साथ ही किसानों, व्यापारियों और स्थानीय उद्यमियों को भी बेहतर परिवहन नेटवर्क का लाभ मिल सकता है।

बलिया से लखनऊ, आगरा और दिल्ली तक बेहतर कनेक्टिविटी

इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह संचालित होने के बाद बलिया से लखनऊ और दिल्ली की यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का संपर्क पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से होने पर यात्री गाजीपुर के रास्ते लखनऊ पहुंच सकेंगे। वहां से लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और आगे यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए नोएडा तथा दिल्ली-एनसीआर की ओर यात्रा की जा सकेगी।

इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क उपलब्ध होगा।

व्यापार और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को केवल सड़क परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वांचल के आर्थिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

बलिया और गाजीपुर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले प्रमुख जिले हैं। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा हो सकती है।

इसके अतिरिक्त परिवहन, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, स्थानीय व्यापार और सड़क किनारे विकसित होने वाली सेवाओं में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

हालांकि, इन आर्थिक लाभों का वास्तविक प्रभाव एक्सप्रेसवे के पूर्ण संचालन और आसपास के क्षेत्रों में विकसित होने वाली सुविधाओं पर निर्भर करेगा।

यूपी-बिहार के बीच मजबूत होगा सड़क संपर्क

यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

गाजीपुर से बलिया और आगे मांझी तथा रिविलगंज क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने से बिहार के छपरा एवं आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

बक्सर स्पर के माध्यम से बिहार के बक्सर क्षेत्र का संपर्क भी मुख्य कॉरिडोर से स्थापित होगा।

जनवरी 2027 पर टिकी निगाहें

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का पहला चरण चालू होने के बाद अब परियोजना के शेष हिस्सों को यातायात के लिए खोलने की तैयारियां चल रही हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार दूसरे चरण का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि तीसरे और चौथे चरण को जनवरी 2027 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है।

हालांकि, यात्रियों के लिए सभी हिस्सों का वास्तविक संचालन निर्माण कार्य, सुरक्षा संबंधी जांच और आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियों के पूरा होने पर निर्भर करेगा।

बलिया टुडे विशेष: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का पूर्ण संचालन बलिया और पूरे पूर्वांचल के लिए सड़क कनेक्टिविटी की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकता है। इससे बिहार के साथ आवागमन बेहतर होने के साथ क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।