क्या मम्मी-पापा अपने ही हाथों से अपने बच्चों की जान ले सकते हैं? ये सवाल 17 साल पहले, साल 2008 में आरुषि तलवार हत्याकांड के वक्त उठा था. उस समय पूरा देश स्तब्ध था. लोगों को यकीन ही नहीं हुआ कि एक डॉक्टर दंपत्ति, नुपुर और राजेश तलवार अपनी इकलौती बेटी का कत्ल कर सकते हैं. आरुषि की मौत के 17 साल बाद अब एक और मामला उसी सवाल को फिर से जिंदा कर गया है. इस बार गुरुग्राम में 25 साल की राधिका यादव की हत्या के आरोप उसके अपने पिता पर लगे हैं.
गुरुग्राम के पॉश सुशांत लोक इलाके की एक तीन मंजिला कोठी. 10 जुलाई की सुबह करीब 10:30 बजे की बात है. अचानक एक गोली चलने की आवाज आती है. घर के ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले राधिका के चाचा कुलदीप यादव भागकर ऊपर पहुंचते हैं. किचन के फर्श पर राधिका खून से लथपथ पड़ी है. उसके पास एक पिस्टल पड़ी है, जो पिता दीपक यादव की है. आनन-फानन में राधिका को अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने राधिका को मृत घोषित कर दिया.इसके बाद गुरुग्राम पुलिस मौके पर पहुंची. जांच शुरू हुई. घर में उस वक्त सिर्फ तीन लोग मौजूद थे. राधिका, उसके पिता दीपक यादव और मां मंजू यादव दीपक का बेटा धीरज उस वक्त घर से बाहर था. मां मंजू बीमार थीं और दूसरे कमरे में लेटी थीं. चाचा कुलदीप के बयान और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर शक की सुई सीधे दीपक यादव पर गई. एफआईआर में दर्ज बयानों के अनुसार, दीपक यादव ने खुद कबूल किया कि उन्होंने ही अपनी बेटी को अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारहैं l

